अंधकार युग: सूरज क्यों छिप गया?

अंधकार युग: सूरज क्यों छिप गया?
Solar Eclipse

सूरज क्यों छिप गया ,मानोगे अगर मैं  आपसे कहूँ?

१८ माह से कमजोर सूर्य !

१८ महीने के लिए अदृश्य चाँद !

18 महीने हिमयुग!

18 महीने का अंधेरा!

अन्धकारयुग,  एक असहनीय सत्य !

सूरज क्यों छिप गया ? सूरज का अनुषाशन

यदि ब्रह्मांड में अगर कोई सबसे नियमित है, तो वह सूर्य है। सूर्य जो हर सुबह अपने नियत समय पर नियमित रूप से उगता है और हर शाम को अपने नियत समय पर अस्त होता है।

मानसून के दौरान काले बादलों में छिपा सूरज ५-१०-१५ दिनों तक नहीं उगता और दिखता भी नहीं है I उस समय भी सूर्य के प्रकाश के अभाव में पृथ्वीवासियों को कितना कष्ट होता है ?(केवल पिछले चार – पांच दिनों की बात करें… मॉनसून के प्रभाव में अविरत काले बदल छाए रहते है और बारिश होती रहती है उस दौरान सूर्य के दर्शन नहीं हुए, बस उतने दिनो में हमनें क्या महसूस किया वो अपनी नजर के सामने है I सोचिये अगर एक साल तक सूर्य के दर्शन ही ना हो तो? तो पृथ्वी वासियो की हालत क्या होगी ?! ) 

अब कल्पना कीजिए कि लगातार १८ महीनों तक आकाश में सूर्य की उपस्थिति के बावजूद पृथ्वी पर अंधेरा व्याप्त हो , क्या ऐसी स्थिति की कल्पना भी हो सकती है क्या ?! ।

कभी नहीँ ! लेकिन वास्तव में वर्ष ५३६ से ५३८ के दौरान आकाश में सूर्य की उपस्थिति के बावजूद लगातार 18 महीनों तक अँधेरा बना रहा! वो ख्याल हमें आज भी थरथरा देता है। तो उस समय पृथ्वी पर रहने वाले पृथ्वीवासियों का क्या हुआ होगा?! और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब आप और मैं, और आपके पूर्वज उस भयानक समय में अपनी जान बचा पाए थे, तब आज आप और मैं सांस ले रहे हैं और अपना दिल आज भी धड़क रहा है। पृथ्वी पर जीवित होने का एक अहसास !

एक अविश्वसनीय सत्य !

एक अकल्पनीय तथ्य !

कुछ वैज्ञानिकों और कुछ शोधकर्ताओं ने वर्ष ५३६ को “जीवित रहने के लिए सबसे खराब वर्ष” के रूप में वर्णित किया है।

“For the sun gave forth its light without brightness, like the moon, during the whole year.”

सूरज क्यों छिप गया – जाने

दोपहर भर स्वयं प्रकाशित सूर्य चन्द्रमा की तरह चमकता था। सूरज बहुत निस्तेज रहता था और मरियल लग रहा था। कोहरे के कारण सूरज की किरणें लालटेन के कांच पर जमी कालिख के जैसी रौशनी की तरह, धरती पर पड़ रही थी…लाल दिखने वाला सूरज अपनी पहचान और अपना असली रंग खो चुका था और वह बैंगनी दिखने लगा था……पृथ्वी तक पहुँचने वाली किरणें बहुत बे-दम थीं…और सूरज की उन किरणों ने धरती पर जीवित चीजों को जीवित रखने की क्षमता खो दी थी और जब खुद सूरज ही मरियल बन गया था तो वो किसी और का क्या जीवित रख पाता ! दिन भर धरती पर किसी चीज की छाया नहीं पड़ती थी !

सूरज की रोशनी से बदलते मौसमों का धरती पर असर,पूरी तरह बदल गया था I सर्दियों को छोड़कर सारे मौसम ग़ायब हो गए थे…

“A winter without storms, a spring without mildness, and a summer without heat”

जिससे ऐसा प्रतीत होता था की मानो पृथ्वी हिमयुग में प्रवेश कर गई है! बिना धूप के खेती संभव नहीं थी, जिससे काफी लम्बे समय तक सूखे जैसे हालात बने रहे। फल अपने मूल गुणों और अपने मूल स्वाद को भी भूल चुके थे। मानो जैसे आसमान का आधिपत्य एलियंस ने ले लिया ऐसा लग रहा था ! पृथ्वी पर प्रत्येक स्थान के प्रत्येक मौसम का तापमान अपने सामान्य तापमान से ५ से ६ डिग्री नीचे गिर गया था ।

ज्वालामुखी की वजह से अंधेरा छाया

सूरज के धूमिल और तेजहीन होने का रहस्य क्या था? ऐसा कहा जाता है कि वर्ष ५३६ की शुरुआत में llopango (लोपांगो) और Iceland (आइसलैंड) में ज्वालामुखी फटे थे और इतने तीव्र थे कि उन्होंने आकाश से लगभग +150 किमी ऊपर हवा में सल्फर और बिस्मथ की अभेद्य दीवार का गठन कर दिया था I उस अभेद्य दीवार ने पृथ्वी पर आने वाली सूर्य की किरणों को पूरी तरह से रोक दिया था।

माना जाता है की उस समय एक के बाद एक कई और जगहों पर भी ज्वालामुखी फटे। जिससे ज्वालामुखी की राख, धूल, धुआं और कोहरा वातावरण में पूरी तरह से छ गये ..और वातावरण में इस राख, धूल, धुंआ और कोहरे का दायरा करीब १८ महीने तक यानी डेढ़ साल तक रहा !

बिस्मथ एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक ( atomic symbol) बी है और इसकी संख्या 83 है। बिस्मथ एक सफेद चमकदार धातु है। वह  सीसा और टिन जैसा दिखता है। हवा में ऑक्सीकरण से बिस्मथ की सतह पर गुलाबी रंग का रंग आ जाता है। सल्फर और बिस्मथ की वायुमंडल में वापसी ने शायद सूर्य की पराबैंगनी किरणों का रंग बदल दिया हो। सदियों बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ५३६ – ५३८ साल में जो आश्चर्य पैदा हुआ उसका कारण बिस्मथ था।)

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