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जूही शाम के समय अपने ठिकाने  पर लौटते हुए तोतों की बातें कर रही थी कि तभी एक तोता आकर उसके कंधे पर बैठ गया। जूही के भाई ने उसे उड़ानें की कोशिश की लेकिन वो बिदक कर रह गया, उड़ा नहीं। लगता था वह घायल हुआ हो । जूही बोली, ये रास्ता भूल गया है…और घायल भी है। देखो ये कैसे मुझे देख रहा है, हमें इसकी मदद करनी चाहिए। जूही उसे कलाई पर बैठाते हुए बोलती है, : स्टोर रूम में एक पिंजरा है, उसे साफ करके उसी में अपने मिठ्ठू को रक्खूंगी।

जूही ने मां को सारी बातें बता दी। मां साफ कर पिंजरा ले आई। जूही ने तोते को पिंजरे में रखा, तोता पिंजरा भी बड़े ध्यान से देख रहा था। जूही ने एक कांच के छोटे बाउल में आम के टुकड़े काटकर व हरी मिर्च लेकर पिंजरे में रख दिया।  साथ ही एक कटोरी में पानी भी रख दिया। मां ने रोटी का टुकड़ा भी पिंजरे में रख दिया। जूही ने ध्यान से देखा कि तोता उन खाने की चीजों को बहुत गौर से देखने के बाद ही खा रहा है।  उसने रोटी के टुकड़े को पास से देखा फिर परे कर दिया।

बारह साल की इस बच्ची को पक्षियों से बहुत लगाव थ। पापा फारेस्ट रेंजर थे इसलिए सरकारी आवास भी जंगल के करीब ही मिला था। उसने ठान लिया था कि आज पापा से तोते के बारे मे सब पूछूंगी। कल संडे है, पापा जल्दी सोने का बहाना भी नहीं बना सकते। पापा के लेटते ही जूही उनके बगल में बैठ गई और बोली, पापा आज न…पापा उसकी बात बीच में ही रोक कर बोले,मुझे सब मालूम है मैडम जी! तुम्हारी मम्मी ने सब मुझे बता दिया है।  और तुमने एक पक्षी की मदद करके बहुत अच्छा काम किया है। जूही बोली, पापा ये तोता मुझे नहीं देख रहा था बल्कि खाने पीने की चीजों को भी बहुत गौर से देखने के बाद ही खा रहा था…. ऐसा लग रहा था जैसे मुझसे ज्यादा उसको इन चीजों की ज्यादा जानकारी है! पर ऐसा क्यों पापा बताइए न?

पापा: देखो जूही कुदरत ने पक्षियों को देखने की क्षमता हमसे ज्यादा दी है। इंसान केवल मुख्य रूप से तीन रंगों को  और उसकी मिलावट के रंगों को ही देखते और पहचानते हैं। लेकिन तोते की आंख में एक फोर्थ कोन होता है जिससे वो “अल्ट्रा वायलेट रेज” ( पराबैंगनी तरंगें ) , उसे भी देख सकते हैं पर हम लोग नहीं देख सकते। इन्हीं अल्ट्रा वायलेट रेज की वजह से वो चीज़ों की आंतरिक बनावट व विशेषता को देख पाते हैं। हमें और तुम्हें एक साधारण केला पीला दिखेगा लेकिन एक तोता उसकी बारीक बनावट और कच्चे पक्के होने की भी जानकारी उसे देखकर ही हासिल कर लेता है। इसीलिए तुम्हारा मिठ्ठू इतने ध्यान से चीजों को देख रहा था और तुमको ये भी बताऊं कि इनके पंखों में भी अल्ट्रा वायलेट रेज मौजूद होते हैं जिनकी मदद से ये अपनी पसंद का साथी खोज सकते हैं। अपनी इसी खूबी के चलते ये अपने बच्चों की भी पहचान कर पाते हैं।

 पापा की बातें सुनकर जूही बोली, मुझे तो आज एक नयी जानकारी पता चली। कुदरत ने पक्षियों को भी इतना खास बनाया है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को पता होगा! पापा ने जूही को थपथपाते हुए कहा, अब सो जाओ बेटा बहुत रात हो गई है और हां वो तोता रास्ता भटककर तुम्हारे पास आ गया था और घायल भी है । स्वस्थ होते ही उसे आजाद कर देना, वो कुदरत के पास ही खुश रहेगा।

जूही ने खुशी से सिर हिलाकर कहा, जी पापा। और ऐसी मजेदार , ज्ञान के साथ hindikahniyansuno.com परोसता है , इसको जानने के लिए क्लिक करें : https://hindikahaniyansuno.com/?s=mini+.

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