Aesop 2 Stories ईसप की 2 नैतिक कहानियाँ

Aesop 2 Stories ईसप की 2 नैतिक कहानियाँ

Aesop 2 Stories नैतिक कहानियाँ चमगादड़ की चालाकी

ईसप की 2 moral stories इसमें पहली है –

एक बार एक  चमगादड़ हवा में उडते उडते दिवार से टकराया। वह चक्कर खाकर जमीन पर गिर गया । गिरते ही उसे एक वैसल ने पकड लिया।

चमगादड़ डरकर अपनी जान बख्शने की गुजारीश करने लगा। उसके बार बार  गिडगिडाने पर

वेसेल ने कहा, “मैं सभी पक्षियों का दुश्मन हूं । सभी पक्षी गण मेरा भक्ष है। मैं नहीं बख्शूंगा।”

चमगादड़ ने उसे कहा, “मैं एक पक्षी नहीं, बल्कि एक चूहा हूं । अब तो ना मैं तुम्हारा दुश्मन हूं, ना ही  भक्ष । इसलिए तुम मुझे बक्श दो।”  

यह बातें सुनकर वेसेल ने अपना विचार बदला । इस तरह चमगादड़ मुक्त हो गया। वेसेल को धन्यवाद देकर निकल गया ।

 विपदा आने पर घबराने के बजाय धीरज से उसका सामना किया। संकट से बच लिया ।

कुछ ही समय बाद चमगादड़ फिर से जमीन पर गिर गया। फिर उसे एक और वेसल ने पकड़ लिया। चमगादड़  फिर इस वेसल से अपनी जान बख्शने की गुजारीश करने लगा।

वेसेल ने कहा, “चूहों से मेरी विशेष दुश्मनी है। मैं उन्हे किसी  भी हालत में नहीं बख्शता।”

चमगादड़  ने वेसेल को आश्वासन दिया, “मैं चूहा नहीं हूं, बल्कि एक चमगादड़ हूं। अब तो ना मैं तुम्हारा दुश्मन हूं, ना ही भक्ष । इसलिए मुझे बक्श दो।”  

इस तरह  निडरता से वेसेल को चकमा देकर चमगादड़  दूसरी बार भी बच गया।

सबक:-आपत्कालीन परिस्थितियों को अच्छे समय में बदलना बुद्धिमानी है।

2 moral stories

2 Aesop Stories धूर्त भेड़िया

इसप द्वारा भेड़िये और भेड़ के बच्चे की यह कहानी सीखाती है, कि कैसे भेड़िया असहाय मेमने को मारने के लिए बहाने बनाता हैं।

एक बार जंगल में एक मेमना भेड़ का बच्चा अपने समुह से भटक जाता है। उसे अकेला देखकर एक भेड़िया, उस मेमने के पास जाता है। भेड़िया मेनने पर तरस खाकर उसको आश्वस्त करता है। भेड़िये ने मेनने से कहा, “मैं ने फैसला किया कि वह बिना किसी औचित्य के मेमने पर अपने पंजे नहीं रखूंगा।”

 Aesop 2 Stories भेड़ियेकी कहानीमे आगे – कुछ दिन के बाद भेड़िया उसे खाने के लिए संयुक्त कारण खोजने लगा। वह सोचने लगा भेड़िये के अधिकार को सही ठहराने के लिए कुछ वास्तविक या काल्पनिक कारण खोजने होंगे।

एक दिन भेड़िये ने मेमने से कहा, “अरे मेमने, पिछले साल तुमने मेरा अपमान किया था।”

मेमने ने रोने की आवाज़ में कहा, “मैं उस समय पैदा भी नहीं हुआ था।”

फिर भेड़िये ने उस पर आरोप लगाया, “ तुम मेरे चरागाह से घास खाते हो।”

“नहीं, साहब,” मेमने ने जवाब दिया, “ मैंने अभी तक घास का एक तिनका भी नहीं खाया है।”

फिर भेड़िये ने कहा, “तुम मेरे कुएं से पानी पीते हो।”

“नहीं,” मेम्ने ने जवाब दिया, “मैंने अभी तक आपका कोई भी पानी नहीं पिया है, क्योंकि अभी  मेरी माँ का दूध मेरे लिए भोजन और पेय दोनों है।”

यह सुनकर भेड़िये ने उसे पकड़ लिया और कहा, “ठीक है! मैं भी तो भूखा और भोजनहीन नहीं रह सकता, भले ही आप मेरे सभी आरोपों को स्वीकार नहीं करते। ” उसने उसे उठाया और खा लिया

Aesop 2 Stories का सबक: अत्याचारी व्यक्ति हमेशा अत्याचार करने के बहाने ढूंढेगा।

          हमारी जिंदगी मे अक्सर ऐसा होता है। हमारे दिमाग को अपने अहं की ही बात को सही ठहराने की आदत होती है।  यानी के अहं को  स्वयं पर हावी होने की लगातार चुनौती होती है । इस का अर्थ यह है  कि हमारा ‘अहं’ हमारे अच्छे आत्मा –  स्वयं पर हमला करता है। तथा अहंकार को बढ़ाना चाहता है।

   हमारा मन अपने आपको अच्छा लगे ऐसा करने के लिए बहाने ढूंढता है। उदाहरण के लिए, समय से पहले उठने की सोचकर , मैं हर रात अलार्म लगा कर सो जाऊंगा । लेकिन अगली सुबह घंटी बजते ही , अहं जाग  उठेगा। यह सोच को बदल देगा।  ‘ मैं और सोना चाहता हूं’;  ‘तैयार नहीं हूं ’; ‘ क्या जल्दी है? ’ आदी  बहुत सारे बहाने बनाएगा।

ईसप की और 4 नैतिक कहानियाँ यहाँ पढें।

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