Jataka Tales Tale 1 Buddha

Jataka Tales Tale 1 Buddha

Jataka Tales Tale 1

Jataka Tales Tale 1 then , What are Jataka Tales? जातक कहानिय़ाँ आपको पाली बुद्धिस्ट धार्मिक पुस्तकों में से मिलेंगी . यह  कहानिय़ाँ बुद्धा की कुछ अगले जन्म की  कहानिय़ाँ है । कोई कोई कहानी , एक से ज्यादा बार कहीं ना कहीं अलग अलग जगह पर अलग अलग भेश में अलग अलग तरीके से पेश की जाती है। और बहुत सारी कहानियाँ एक ही जन्म में एक साथ में पढ़ने को मिलती है हर एक कहानी अलग ढांचे में है आज की कहानी में से निकलती हमेशा बौद्धिस्त्तव की जिंदगी में घटी कुछ घटना, उनके मित्र और उसके आसपास रहने वालों की गलतियां और कभी-कभी एथिक्स के प्रश्न और अपने श्रेष्ठ गुण क्या होने चाहिए उसके बारे में होती है।

Jataka Tales Tale 1 जब यह बातें बुद्धा सिखाते हैं तब पहले की कुछ कहानी उसके (उनके पहले के अस्तित्व में)  बात उनके अभीके – कहानीके समयकी में पहले जो घटा था वह फिर से देखने को मिलेगा या तो फिर उसके जैसा किस्सा होता है। उसके नैतिक परिणाम को भी कहानी समझाती है। हर एक कहानी में और कहानी के समयकालमे वर्षों में यह सिखाया जाता है । यह बातें एक कविताके पद की तरह है और इसमें अगर कोई  पद्य में आती है तो उसके साथ में कॉमेंट्री होती है।  

Jataka Tales Tale 1 of Buddha’s Previous Birth

लेकिन बहुत सारी जातक कहानिय़ाँ ( Jataka Tales Tale 1)  सिर्फ एक नैतिक ढाँचेमे होती है जो ऐसे लोगों को जो अभी तक कन्वर्ट नहीं हुए हैं और उनको कुछ बातें सिखानी है। जैसे कि एक सिद्धांत है कि जिंदगी हमेशा के लिए नहीं रहती, सब चीज परमेनेंट नहीं होती तब बुद्धा में विश्वास रखना चाहिए और अंधविशवास या वहेम से जुडे हुए कुछ रिवाज होते हैं, फिर लत से छुटकारा, नफरत से छुटकारा, मोह से छुटकारा और किस तरह से शांति और स्वस्थता पायी जाएगी – इसकी कहानी होती है। आज का जो सिलेक्शन है उसमें ज्यादा कर दो लोग जो कहानियाँ मे इंटरेस्ट रखते है वह कहानिय़ाँ चुनी हुई है।

यह Jataka Tales Tale 1 Jataka Tales मेसे से एक नई चुनी हुइ एक कहानी है।  एक बार बनारस के राजा ब्रह्मभट्ट अपने राज्य में (बनारस) में भ्रमण कर रहा था । सब जगह raja मजे करने के लिए घूम रहे थे और फ्रूट और ful  ढूंढ रहा था ।तब उन्होंने एक औरत को बड़ी मस्ती में गाते हुए सुना और अपने हाथ में वह बहुत सारी लकड़ियां जमा करके रखी थी ।

राजा ब्रह्मभट्ट उसके प्रेम में पड़ गया और उसके साथ में उसने संबंध जोड़ना चाहा। धीरे धीरे राजा के साथ मिलाप के कारण जैसे कि वह औरत के जैसे कि उसको लगा कि उसको कुछ बच्चा होने वाला है।   

तब राजा ने उसको अपने उंगली से एक अंगुठी निकाली और उसको अंगुठी ले दे दी। और फिर उसको यह कहकर भेजा,-  अगर उसे लड़की होती है, तो यह अंगुठी बेचने से जो पैसे आते हैं तो उससे उसका लालन-पालन करना होगा। अगर लडका हुआ तो उसको मेरे पास लाना और वह अंगुठी भी वापिस लाना और बच्चे को भी मुझे दे देना ।                               

कुछ समय बाद जब उस औरत का प्रेगनेंसी का समय हो गया तो उसने बुद्ध को जन्म दिया । बडे होकर मैदान में खेलते थे तब और बच्चे उसे चिल्लाते थे – नही- पिताजी ने मुझे मारा है और यह सुनकर सब लोग उसमें चिल्लाते थे कि नहीं – पिताजी ने उन्हें मारा। यह सुनकर वह अपनी मां के पास चले जाते और उसको पूछते कि उसका पिता कौन है  । पद्मावती – आप बनारस के राजा के पुत्र  हो।   

तो बच्चा उनसे पूछता कि इसकी क्या प्रुफ है कि मैं उनका पुत्र हुँ  तुम्हारे पिता जब मुझे छोड़ कर चले गया तब मेरे हाथ में अंगुठी दे दी और मुझसे कहा कि अगर लड़की हो जाए तो उसके लालन-पालन के लिए यह अंगुठी बेचकर जो पैसा आएगा उससे करना। लेकिन अगर लड़का होता है तो आप यह अंगुठी और लड़का दोनों मेरे पास लेकर आना। बच्चा पूछता हैं क्यों नहीं आप मेरे पिता से मिलने को लेकर जाती ?   

लड़के ने अपना मन बना लिया tha तो इसके लिए उसको लेकर वह अपने पति के महल के बाहर खड़ी रही और और चौकीदार से कहा कि मैं आई राजा ने उनको और अंदर जाकर उसने राजा के सामने झुक कर सलाम किया।

और उसने कहा यह आपका बेटा है  और आपकी अंगुठी । यह हकीकत सबके सामने आनेपर राजाको शर्म आयी, तो उसने जवाब दिया कि यह मेरा लड़का नहीं है। तो लड़के की मां ने उसके सामने अंगुठी रख्खी और कहा – अब मेरे पास मेरा सच साबित करने के लिए कोई भी चीज़ नहीं है। 

कोई बात नहीं है एक मुझे सच का एक-एक करना पड़ेगा मैं कहती हूं कि यह बच्चा अगर तुम्हारा है तो मैं प्रार्थना करती हूं कि वह हवा में उड़े। लेकिन नहीं है तो वह जमीन पर गिर जाए और मर जाए।

तो ऐसा कह कर उसने बौद्ध को अपने हाथ पाँवसे पकड़ के उठाया और हवा में ऊंचा फेंक दिया। बुद्ध हवा में बैठे और अपने पिताजी से यह सच कविता के रूपमे समझाया – मैं यहां बैठा हूं तुम्हारा बेटा, वह बड़े राजा मुझे पालन के लिए बुलवाया । आप राजा है लेकिन अब मेरी बात सुननी चाहिए।    

यह सुनकर राजा ने अपने हाथ लंबे किए और कहा – मेरे बेटे मेरे पास आ जाओ। 

Jataka Tales की हर कहानीमे एक चमत्कार और एक संदेश होता है। बच्चा जाकर उनकी गोद में बैठ गया और उसके पिता ने उसके बड़े मान से स्वागत किया और उसकी मां को बुलाकर उसके करीब बिठाया राजा ने उनको राजप्रतिनिधि बनाया और उनकी मां को महारानी बना दिया । जब राजा ब्रह्मभट्ट गुजर गए, तो बुद्धेश्वर  सिंहासन पर बैठे और काफी साल राज करते रहे। अपने राज में अच्छी तरह से न्याय पूर्वक राजधर्म का पालन करने के बाद वह समाधि लेनेको रण में चले गये ।  

 

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